हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 4.9.9

अध्याय 4 → खंड 9 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 4)

सामवेद: | खंड: 9
आविर्मर्या आ वाजं वाजिनो अग्मं देवस्य सवितुः सवम् । स्वर्गाँ अर्वन्तो जयत ॥ (९)
सविता ने परिष्कृत सोमरस को ग्रहण कर लिया है. वे तेजस्वी व मनुष्य के लिए हितकारी हैं. यजमानों को उन से जीतने के लिए घोड़े और स्वर्ग की इच्छा करनी चाहिए. (९)
Savita has embraced the sophisticated Somers. They are brilliant and beneficial to human beings. Hosts should desire horses and heaven to win from them. (9)