हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.10.12

अध्याय 5 → खंड 10 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 10
परि कोशं मधुश्चुतँ सोमः पुनानो अर्षति । अभि वाणीरृषीणाँ सप्ता नूषत ॥ (१२)
पवित्र सोमरस छनछन कर घड़े में टपकता और अपना मीठा रस द्रोणकलश में पहुंचाता है. सात छंदों (पदों) वाली ऋषियों की वाणी सोम की स्तुति करती है. (१२)
The holy Someras filters and drips into the pitcher and delivers its sweet juice to Dronakalash. The voice of the sages with seven verses (verses) praises Soma. (12)