सामवेद (अध्याय 5)
पुनानो अक्रमीदभि विश्वा मृधो विचर्षणिः । शुम्भन्ति विप्रं धीतिभिः ॥ (२)
सोमरस बुद्धि बढ़ाने वाला, पवित्र व सभी शत्रुओं पर आक्रमण करता है. ज्ञानी उस सोम की स्तोत्रों से शोभा बढ़ाते हैं. (२)
Someras is intelligent, holy and attacks all enemies. Gyani adorns that Soma with stotras. (2)