हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.3.4

अध्याय 5 → खंड 3 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 3
असर्जि रथ्यो यथा पवित्रे चम्वोः सुतः । कार्ष्मन्वाजी न्यक्रमीत् ॥ (४)
जैसे रथ का घोड़ा छोड़ा जाता है, वैसे ही सोम को दो फलको से निचोड़ कर छानने वाले बरतन में छोड़ा जाता है. घोड़े की तरह वेगवान सोमरस यज्ञ रूपी युद्ध में जाता है. (४)
Just as the horse of the chariot is released, so Soma is squeezed from two fruits and left in the filtering vessel. Like a horse, The Vigwan Somras goes to the war of yajna. (4)