सामवेद (अध्याय 5)
अया पवस्व धारया यया सूर्यमरोचयः । हिन्वानो मानुषीरपः ॥ (७)
हे सोम! आप मनुष्यों का हित करने वाले व जल को बरसात के लिए प्रेरणा देने वाले हैं. जिस धारा से आप सूर्य को प्रकाशित करते हैं, उसी धारा से आप इस पात्र में प्रवेश कीजिए. (७)
O Mon! You are the one who benefits human beings and inspires water to rain. Enter this vessel from the stream through which you illuminate the sun. (7)