हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.3.7

अध्याय 5 → खंड 3 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 3
अया पवस्व धारया यया सूर्यमरोचयः । हिन्वानो मानुषीरपः ॥ (७)
हे सोम! आप मनुष्यों का हित करने वाले व जल को बरसात के लिए प्रेरणा देने वाले हैं. जिस धारा से आप सूर्य को प्रकाशित करते हैं, उसी धारा से आप इस पात्र में प्रवेश कीजिए. (७)
O Mon! You are the one who benefits human beings and inspires water to rain. Enter this vessel from the stream through which you illuminate the sun. (7)