हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.4.2

अध्याय 5 → खंड 4 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 4
आ ते दक्षं मयोभुवं वह्निमद्या वृणीमहे । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥ (२)
हे सोम! आप बलदाता, सुखदाता, धनदाता, शत्रुनाशक व अनेक लोगों द्वारा चाहे जाते हैं. आज यज्ञ में हम आप के उस बल को याद करते हैं. (२)
O Mon! You are a strong, happy, money giver, destroyer and many people. Today, in the yajna, we remember that force of yours. (2)