हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.6.2

अध्याय 5 → खंड 6 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 6
प्र काव्यमुशनेव ब्रुवाणो देवो देवानां जनिमा विवक्ति । महिव्रतः शुचिबन्धुः पावकः पदा वराहो अभ्येति रेभन् ॥ (२)
यजमान उशना ऋषि की तरह स्तोत्रों का पाठ करते हैं. वे देवताओं से संबंधित वृत्तांत बताते हैं. वे ब्रती हैं. सोमरस प्रकाशमान व पवित्रकारी है. उत्तम सोमरस आवाज करते हुए कलश में छनता है. (२)
The host recites the stotras like Ushna Rishi. They tell accounts related to the gods. They are bratis. Someras is enlightening and pious. The best somers makes a sound and filters in the urn. (2)