हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.7.1

अध्याय 5 → खंड 7 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 7
प्र सेनानीः शूरो अग्रे रथानां गव्यन्नेति हर्षते अस्य सेना । भद्रान्कृण्वन्निन्द्रहवान्त्सखिभ्य आ सोमो वस्त्रा रभसानि दत्ते ॥ (१)
हे सोम! आप सेनानायक व वीर हैं. आप यजमान के लिए गौ आदि धनों को देने की इच्छा रखते हैं. आप रथ के आगेआगे चलते हैं. आप को देख कर सेना का हौसला बढ़ता है. आप मित्रों और यजमानों के लिए इंद्र की प्रार्थनाओं को कल्याणकारी बनाते हैं. आप तेजस्वी हैं. (१)
O Mon! You are a commander and a hero. You wish to give money like cow etc. for the host. You walk ahead of the chariot. Seeing you boosts the morale of the army. You make Indra's prayers welfare for friends and hosts. You are stunning. (1)