सामवेद (अध्याय 5)
प्र हिन्वानो जनिता रोदस्यो रथो न वाजँ सनिषन्नयासीत् । इन्द्रं गच्छन्नायुधा सँशिशानो विश्वा वसु हस्तयोरादधानः ॥ (४)
सोम स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक को उत्पन्न करने वाले हैं. वे दोनों लोकों को गति देने वाले हैं. वे तेजी से इंद्र के पास जाते हैं. वे यजमानों को बहुत वैभव देने के लिए आते हैं. (४)
Soma is the Creator of heaven and earth. They are going to speed up both the worlds. They quickly go to Indra. They come to give a lot of glory to the hosts. (4)