हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 5.9.2

अध्याय 5 → खंड 9 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 5)

सामवेद: | खंड: 9
अचोदसो नो धन्वन्त्विन्दवः प्र स्वानासो बृहद्देवेषु हरयः । वि चिदश्नाना इषयो अरातयोऽर्यो नः सन्तु सनिषन्तु नो धियः ॥ (२)
हे सोम! आप दूसरों से प्रेरित नहीं होते. आप का रस हरा है. आप को विधिवत निचोड़ा जाता है. आप हमारे यज्ञ में पधारिए. आप यज्ञ और यजमान के दुश्मन तथा दान न देने वाले लोगों को अन्न की इच्छा होने पर भी अन्न, धन मत दीजिए. हमारी प्रार्थनाएं जिनजिन देवताओं के लिए हैं, वे उनउन देवताओं तक पहुंचें. (२)
O Mon! You are not inspired by others. Your juice is green. You are duly squeezed. You come to our yajna. Do not give food, money to the enemies of yajna and host and people who do not donate even if they want food. Let our prayers reach out to the gods for whom we are. (2)