सामवेद (अध्याय 5)
वृषा मतीनां पवते विचक्षणः सोमो अह्नां प्रतरीतोषसां दिवः । प्राणा सिन्धूनां कलशाँ अचिक्रददिन्द्रस्य हार्द्याविशन्मनीषिभिः ॥ (६)
सोम सब की इच्छा पूरी करने वाले, विशेष कृपा दृष्टि रखने वाले, उषा और सूर्य की शक्ति बढ़ाने वाले हैं. विद्वान् यजमान इसे छानते है. नदियों का जल मिला कर इसे तैयार किया गया है. इंद्र के पेट में पहुंचने के लिए यह शब्द करता हुआ घड़े में प्रवेश करता है. (६)
Soma is the one who fulfills everyone's wish, has special grace, enhances the power of Usha and Sun. Scholars filter it out. It has been prepared by mixing the water of the rivers. To reach Indra's stomach, this word enters the pitcher. (6)