सामवेद (अध्याय 6)
त्वया वयं पवमानेन सोम भरे कृतं वि चिनुयाम शश्वत् । तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः ॥ (५)
हे सोम! आप जग को पवित्र करने वाले हैं. आप की मदद से हम युद्ध में अपना कर्तव्य भलीभांति निबाह सकें. अदिति, मित्र, वरुण, पृथ्वी, सिंधु देवता तथा स्वर्गलोक हमें यशस्वी बनाने की कृपा करें. (५)
O Mon! You are going to sanctify the world. With your help, we can do our duty well in war. Aditi, Mitra, Varuna, Earth, Sindhu Devta and Heaven, please make us successful. (5)