सामवेद (अध्याय 6)
त्वमेतदधारयः कृष्णासु रोहिणीषु च । परुष्णीषु रुशत्पयः ॥ (१)
हे इंद्र! काली, लाल और अनेक रंग वाली गायों में (सब में) आप ने एक जैसा चमचमाता सफेद दूध स्थापित किया है. हम आप के इस आश्चर्यजनक सामर्थ्य की प्रशंसा करते हैं. (१)
O Indra! In black, red and multi-coloured cows (in all), you have installed the same gleaming white milk. We appreciate this amazing power of yours. (1)
सामवेद (अध्याय 6)
अरूरुचदुषसः पृश्निरग्रिय उक्षा मिमेति भुवनेषु वाजयुः । मायाविनो ममिरे अस्य मायया नृचक्षसः पितरो गर्भमादधुः ॥ (२)
उषा के संबंधी सूर्य खास हैं. वे स्वयं प्रकाशमान और सब को प्रकाशित करने वाले हैं. वे ही जल बरसाने वाले मेघ का रूप भी हैं. वे ही आकाश में गर्जना करते हैं. बुद्धिमान देवताओं ने बुद्धि से इस जग को रचा. मनुष्यों को देखने वाले पितरों ने माता के पेट (गर्भ) में इसे स्थापित किया. (२)
Usha's relative Sun is special. They themselves are illuminating and illuminating all. They are also the form of a cloud that showers water. They roar in the sky. Wise gods created this world with wisdom. The ancestors who saw humans installed it in the mother's stomach (womb). (2)
सामवेद (अध्याय 6)
इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा । इन्द्रो वज्री हिरण्ययः ॥ (३)
इंद्र के संकेत (इशारे) मात्र से घोड़े एक साथ रथ में जुत जाते हैं. इंद्र वज्रधारी व आभूषणधारी हैं. (३)
With the mere gesture of Indra, the horses are joined together in the chariot. Indra is a vajradhari and jeweler. (3)
सामवेद (अध्याय 6)
इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्रप्रधनेषु च । उग्र उग्राभिरूतिभिः ॥ (४)
हे इंद्र! आप अत्यंत बलवान हैं. आप को कोई नहीं हरा सकता. आप छोटे और बड़े सभी प्रकार के युद्धों में हमारी रक्षा कीजिए. (४)
O Indra! You are very strong. No one can beat you. You protect us in all kinds of wars, big and small. (4)
सामवेद (अध्याय 6)
प्रथश्च यस्य सप्रथश्च नामानुष्टुभस्य हविषो हविर्यत् । धातुर्द्युतानात्सवितुश्च विष्णो रथन्तरमा जभारा वसिष्ठः ॥ (५)
वसिष्ठ के पुत्र प्रथ एवं भरद्वाज के पुत्र सप्रथ के लिए अनुष्टुप् छंद में स्तुति करते हैं. उन के लिए श्रेष्ठ हवि समर्पित करते हैं. वसिष्ठ ऋषि ने रथंतर नामक सोम को धाता और सब को उत्पन्न करने वाले विष्णु से प्राप्त किया. (५)
Prath, the son of Vasishtha, and Sapratha, the son of Bharadwaj, praise him in anushtup verses. Dedicate the best to them. Vasishtha Rishi received Soma named Rathantar from Vishnu, who created and created everyone. (5)
सामवेद (अध्याय 6)
नियुत्वान्वायवा गह्ययँ शुक्रो अयामि ते । गन्तासि सुन्वतो गृहम् ॥ (६)
हे वायु! आप अपने वाहन से पधारिए. आप के लिए चमकता हुआ सोमरस तैयार किया गया है. आप विधिविधान से सोमरस तैयार करने वाले यजमान के घर पधारते हैं. आप हमारे यहां पधारिए. (६)
O wind! You come by your vehicle. Glazed somers has been prepared for you. You come to the house of the host who prepares someras by law. You come to our place. (6)
सामवेद (अध्याय 6)
यज्जायथा अपूर्व्य मघवन्वृत्रहत्याय । तत्पृथिवीमप्रथयस्तदस्तभ्ना उतो दिवम् ॥ (७)
हे इंद्र! आप अत्यंत वैभवशाली व अपूर्व हैं. वृत्रासुर के नाश के समय आप ने पृथ्वी को दृढ़ और विस्तृत किया. स्वर्गलोक को भी भलीभांति स्थिर किया. आप की सामर्थ्य अद्भुत है. (७)
O Indra! You are very glorious and unique. At the time of the destruction of Vritrasura, you strengthened and expanded the earth. He also fixed heaven well. Your power is amazing. (7)