सामवेद (अध्याय 6)
चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः । आप्रा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षँ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च ॥ (३)
सूर्य देवताओं के दिव्य तेज का समूह हैं. वे मित्र, वरुण तथा अन्ने के नेत्र हैं. सूर्य के उगते ही स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक और अंतरिक्षलोक आदि सभी उन के प्रकाश से जगमगा जाते हैं. (३)
The Sun is the set of divine radiances of the gods. They are friends, eyes of Varuna and Anne. As soon as the sun rises, heaven, earth and space world etc. are all illuminated by their light. (3)