हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 7.4.5

अध्याय 7 → खंड 4 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 7)

सामवेद: | खंड: 4
अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम् । शतं भवास्यूतये ॥ (५)
हे इंद्र! आप हमारे मित्र व यजमानों के संरक्षक हैं. आप हमारी सैकड़ों प्रकार से रक्षा करने के लिए अच्छी तैयारी कर लीजिए. (५)
O Indra! You are our friend and guardian of the hosts. You make good preparations to protect us in hundreds of ways. (5)