सामवेद (अध्याय 7)
अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम् । शतं भवास्यूतये ॥ (५)
हे इंद्र! आप हमारे मित्र व यजमानों के संरक्षक हैं. आप हमारी सैकड़ों प्रकार से रक्षा करने के लिए अच्छी तैयारी कर लीजिए. (५)
O Indra! You are our friend and guardian of the hosts. You make good preparations to protect us in hundreds of ways. (5)