सामवेद (अध्याय 8)
एना वो अग्निं नमसोर्जो नपातमा हुवे । प्रियं चेतिष्ठमरतिँ स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम् ॥ (१)
हे अग्नि! आप विश्व के दूत हैं. आप अमर, प्रिय व अक्षय हैं. हम अपने यज्ञ में आप का आह्वान करते हैं. (१)
O agni! You are the ambassador of the world. You are immortal, dear and akshay. We invoke you in our yajna. (1)
सामवेद (अध्याय 8)
स योजते अरुषा विश्वभोजसा स दुद्रवत्स्वाहुतः । सुब्रह्मा यज्ञः सुशमी वसूनां देवँ राधो जनानाम् ॥ (२)
अग्नि लोगों के लिए धन स्वरूप, विद्वान्, संयमशील व सब को जोड़ते हैं. आप समस्त विश्व को ओज से पूर्ण करते हैं. हम आप का आह्वान करते हैं. (२)
Agni is the form of wealth, scholarly, restrained and connects everyone for the people. You complete the whole world with energy. We call upon you. (2)
सामवेद (अध्याय 8)
प्रत्यु अदर्श्यायत्यू३च्छन्ती दुहिता दिवः । अपो मही वृणुते चक्षुषा तमो ज्योतिष्कृणोति सूनरी ॥ (३)
उषा स्वर्गलोक की पुत्री व अंधकार को दूर करती हैं. वे अपनी किरणों से सभी को प्रकाशित करती हैं. वे आंख की ज्योति हैं. वे अंधकार में ज्योति हैं. वे उत्तम नारी हैं. (३)
Usha is the daughter of heaven and removes darkness. They illuminate everyone with their rays. They are the light of the eye. They are light in darkness. They are excellent women. (3)
सामवेद (अध्याय 8)
उदुस्रियाः सृजते सूर्यः सचा उद्यन्नक्षत्रमर्चिवत् । तवेदुषो व्युषि सूर्यस्य च सं भक्तेन गमेमहि ॥ (४)
सूर्य, नक्षत्र और ग्रह ये तीनों आकाश को प्रकाशमान करते हैं. सूर्य अपनी किरणों का प्रसार करते हैं और प्रकाश से हम भक्तों तक पहुंचते हैं. (४)
Sun, constellations and planets illuminate the sky. The sun spreads its rays and with light we reach the devotees. (4)
सामवेद (अध्याय 8)
इमा उ वां दिविष्टय उस्रा हवन्ते अश्विना । अयं वामह्वेऽवसे शचीवसू विशंविशँ हि गच्छथः ॥ (५)
हे अश्विनीकुमारो! आप स्वर्गलोक के वासी हैं. स्वर्ग प्राप्त करने के इच्छुक लोग अपनी इच्छापूर्ति के लिए आप का आह्वान करते हैं. आप स्तुति करने वालों के पास पहुंचते हैं. हम आप का आह्वान करते हैं. (५)
O Ashwinikumaro! You are the inhabitants of heaven. Those wishing to attain heaven call upon you to fulfill their wishes. You reach out to those who praise. We call upon you. (5)
सामवेद (अध्याय 8)
युवं चित्रं ददथुर्भोजनं नरा चोदेथाँ सूनृतावते । अर्वाग्रथँ समनसा नि यच्छतं पिबतँ सोम्यं मधु ॥ (६)
हे अश्विनीकुमारो! आप युवा नेता हैं और श्रेष्ठ आहार देने वाले व स्तुति करने वालों को प्रेरित करते हैं. कृपया आप अपना रथ रोकिए. आप अपना मन लगा कर मधुर सोमरस का पान कीजिए. (६)
O Ashwinikumaro! You are a young leader and inspire those who give the best diet and praise. Please stop your chariot. You put your mind and drink sweet somers. (6)