हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 9.4.5

अध्याय 9 → खंड 4 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 9)

सामवेद: | खंड: 4
त्वामिदा ह्यो नरोऽपीप्यन्वज्रिन्भूर्णयः । स इन्द्र स्तोमवाहस इह श्रुध्युप स्वसरमा गहि ॥ (५)
हे वज्रधारी इंद्र! यजमान आप को हवि प्रदान करते हैं. वे ही यजमान आप को सोमरस भेंट करते हैं. स्तोता (उपासक) आप के लिए साम गा रहे हैं. आप सुनिए और यज्ञ में पधारिए. (५)
O Vajradhari Indra! Hosts give you havi. They are the ones who present somerasa to you. Stota (worshipper) are singing saam for you. You listen and come to the yagna. (5)