सामवेद (अध्याय 9)
मनीषिभिः पवते पूर्व्यः कविर्नृभिर्यतः परि कोशाँ असिष्यदत् । त्रितस्य नाम जनयन्मधु क्षरन्निन्द्रस्य वायूँ सख्याय वर्धयन् ॥ (८)
सोम पवित्र, अपूर्व व कवि हैं. मनीषी और मनुष्य आप को परिष्कृत करते हैं. आप तीनों सवनों में इंद्र की प्रसिद्धि फैलाते हैं. सोम इंद्र को तृप्ति देते हैं. सोम वायु की मित्रता की बढ़ोतरी के लिए प्रवाहित होते हैं. (८)
Som is pavitra, apoorva and a poet. Mystics and human beings refine you. You spread indra's fame among the three savanas. Som gives satiety to Indra. Soma flows to increase the friendliness of the air. (8)