यजुर्वेद (अध्याय 1)
पुरा क्रूरस्य विसृपो विरप्शिन्नुदादाय पृथिवीञ्जीवदानुम् । यामैरयँश्चन्द्रमसि स्वधाभिस्तामु धीरासोऽअनुदिश्य यजन्ते । प्रोक्षणीरा सादय द्विषतो बधो सि ॥ (२८)
हे परमेश्वर! आप वीरों के और क्रूर युद्धों में बीर यजमानों के सर्वस्व हैं. आप पृथ्वी पर जीवन दान व दानअनुदान की कृपा कीजिए. धीर पृथ्वी को चंद्रमा की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वधा (यज्ञ में दी जाने वाली आहुति) के द्वारा यज्ञ करते हैं. हे याजको! आप यज्ञ में काम आने वाले साधनों को अपने पास ले कर बैठिए. ईश्वर हम से द्वेष करने वालों का वध करने की कृपा करें. (२८)
O God! You are the all of heroes and bir hosts in brutal wars. Please give life and charity on earth. Dhir performs yajna through swadha (sacrifice made in yajna) with the aim of motivating the earth towards the moon. Hey Yazko! You sit with the means used in the yajna. May God bless us to kill those who hate us. (28)