यजुर्वेद (अध्याय 1)
अह्रु॑तमसि हवि॒र्धानं॒ दृꣳह॑स्व॒ मा ह्वा॒र्मा ते॑ य॒ज्ञप॑तिर्ह्वार्षीत्। विष्णु॑स्त्वा क्रमतामु॒रु वाता॒याप॑हत॒ꣳरक्षो॒ यच्छ॑न्तां॒ पञ्च॑ ॥ (९)
हे मनुष्यो! आप देव शक्ति धारण कर सकते हैं. आप हवि धारण करते हैं. आप दृढ़ हैं. आप और आप के यज्ञ के सहयोगी किसी के प्रति कठोर न बनें. विष्णु व विशाल वायुमंडल (पर्यावरण) आप पर कृपा करें. आप की पंचेंद्रियां श्रेष्ठ कार्यो में लगें. (९)
O men! You can hold god power. You wear havi. You are firm. You and your yajna colleagues should not be harsh on anyone. Vishnu and the vast atmosphere (environment) bless you. Your five senses should be engaged in the best works. (9)