हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 10.27

अध्याय 10 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
निष॑साद धृ॒तव्र॑तो॒ वरु॑णः प॒स्त्यास्वा। साम्रा॑ज्याय सु॒क्रतुः॑ ॥ (२७)
यजमान व्रतधारी हैं और वह अनिष्ट दूर करने में संलग्न हैं. यजमान श्रेष्ठ राज्य प्राप्ति हेतु इस सुयज्ञ को कर रहे हैं. वे प्रजापालक बनें. (२७)
The host is fasting and he is engaged in removing evil. The host is doing this suyagya to attain the best kingdom. They should become prajapalaks. (27)