हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 10.6

अध्याय 10 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
प॒वित्रे॑ स्थो वैष्ण॒व्यौ सविर्तुवः॑ प्रस॒वऽउत्पु॑ना॒म्यच्छि॑द्रेण प॒वित्रे॑ण॒ सूर्य॑स्य र॒श्मिभिः॑। अनि॑भृष्टमसि वा॒चो बन्धु॑स्तपो॒जाः सोम॑स्य दा॒त्रम॑सि॒ स्वाहा॑ राज॒स्वः ॥ (६)
आप पवित्रता में स्थित हैं. आप को विष्णु के लिए पवित्र किया जाता है. आप सविता देव से उत्पन्न होते हैं. पवित्र सूर्य की रश्मियों से छन कर जल आकाश में जाता है. आप को सूर्य पवित्र करने की कृपा करें. बाणी को पवित्र करने की कृपा करें. आप तपशकिति प्रदाता हैं. आप सोम को राजोचित पात्रता प्रदान कर सकते हैं. आप के लिए स्वाहा. (६)
You are situated in purity. You are purified for Vishnu. You are born from Savita Dev. Water goes into the sky after filtering it with the rays of the holy sun. Please sanctify you to the sun. Please sanctify Bani. You are an ascetic provider. You can provide rajochit eligibility to Som. Swaha for you. (6)