यजुर्वेद (अध्याय 13)
मयि॑ गृह्णा॒म्यग्रे॑ अ॒ग्निꣳ रा॒यस्पोषा॑य सुप्रजा॒स्त्वाय॑ सु॒वीर्या॑य। मामु॑ दे॒वताः॑ सचन्ताम् ॥ (१)
हे अग्नि! आप धन के उत्पादक, श्रेष्ठ संतति वाले और श्रेष्ठ वीर्य बाले हैं. हम यह सब पाने के लिए आप को आहुतियों से सींचते हैं. आप हमें ग्रहण करने की (स्वीकारने की) कृपा कीजिए. (१)
O agni! You are the producer of wealth, the best offspring and the best semen. We water you with offerings to get all this. Please accept us. (1)