हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 13.22

अध्याय 13 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यास्ते॑ऽ अग्ने॒ सूर्य्ये॒ रुचो॒ दिव॑मात॒न्वन्ति॑ र॒श्मिभिः॑। ताभि॑र्नोऽ अ॒द्य सर्वा॑भी रु॒चे जना॑य नस्कृधि ॥ (२२)
हे अग्नि! सूर्य देव की जो चमकीली किरणें स्वर्गलोक का विस्तार करती हैं, आज उन किरणों से मनुष्यों का विस्तार हो. (२२)
O agni! The bright rays of the Sun God that expand heaven, today human beings should expand with those rays. (22)