यजुर्वेद (अध्याय 13)
मधु॑मान्नो॒ वन॒स्पति॒र्मधु॑माँ२ऽ अस्तु॒ सूर्य्यः॑। माध्वी॒र्गावो॑ भवन्तु नः ॥ (२९)
चनस्पतियां हमारे प्रति मधुमान हों. सूर्य हमारे प्रति मधुमान (कृपालु) हों. गाएं हमारे प्रति माधवी (मधुरतामय) होने की कृपा करें. (२९)
May the chants be sweet to us. May the sun be kind to us. Sing please be Madhavi (sweet) towards us. (29)