हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 13.42

अध्याय 13 → मंत्र 42 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वात॑स्य जू॒तिं वरु॑णस्य॒ नाभि॒मश्वं॑ जज्ञा॒नꣳ स॑रि॒रस्य॒ मध्ये॑। शिशुं॑ न॒दीना॒ हरि॒मद्रि॑बुध्न॒मग्ने॒ मा हि॑ꣳसीः पर॒मे व्यो॑मन् ॥ (४२)
हे अग्नि! आप वायु के प्रिय, वरुण देव की नाभि, ज्ञान के अश्व और जल के बीच रहते हैं. आप नदियों के शिशु, हरे, जलमय व पर्वत पर चिह्न अंकित करने बाले हैं. आप परम व्योमवासी हैं. आप हिंसा मत कीजिए. (४२)
O agni! You live among the beloved of air, the navel of Varun Dev, the horse of knowledge and the water. You are going to mark the baby, green, watery mountain of the rivers. You are the ultimate Vyomvan. Don't do violence. (42)