हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 14.11

अध्याय 14 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
इन्द्रा॑ग्नी॒ऽ अव्य॑थमाना॒मिष्ट॑कां दृꣳहतं यु॒वम्। पृ॒ष्ठेन॒ द्यावा॑पृथि॒वीऽ अ॒न्तरि॑क्षं च॒ विबा॑धसे ॥ (११)
हे इंद्र देव! हे अग्नि! आप पीड़ाहीन हो कर इष्टका को स्थापित करने की कृपा कीजिए. इष्टका अपने पृष्ठ भाग से स्वर्गलोक, पृथ्वीलोक व अंतरिक्षलोक को व्याप्त करती है. (११)
O Indra Dev! O agni! Please be painless and establish the presiding deity. The presiding deity pervades heaven, earth and space from its surface. (11)