यजुर्वेद (अध्याय 14)
मू॒र्द्धासि॒ राड् ध्रु॒वासि॑ ध॒रुणा॑ ध॒र्त्र्यसि॒ धर॑णी। आयु॑षे त्वा॒ वर्च॑से त्वा कृ॒ष्यै त्वा॒ क्षेमा॑य त्वा ॥ (२१)
हे इष्टका! आप मूर्धन्य स्थिर व धारिका हैं. हम आयु, वर्चस्व, कृषि व कुशलक्षेम के लिए आप की स्थापना करते हैं. (२१)
O god! You are a beautiful constant and a streak. We establish you for age, supremacy, agriculture and well-being. (21)