हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.45

अध्याय 15 → मंत्र 45 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अधा॒ ह्यग्ने॒ क्रतो॑र्भ॒द्रस्य॒ दक्ष॑स्य सा॒धोः। र॒थीर्ऋ॒तस्य॑ बृह॒तो ब॒भूथ॑ ॥ (४५)
हे अग्नि! आप यज्ञ में कल्याणकारी व फलदायी हैं. आप दक्ष व कार्य साधक हैं. सारथी की भांति आप ऋत के विशाल रथ के संचालक हैं. (४५)
O agni! You are welfare and fruitful in yajna. You are skilled and work seeker. Like a charioteer, you are the operator of Rita's huge chariot. (45)