हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.49

अध्याय 15 → मंत्र 49 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
येन॒ऽऋष॑य॒स्तप॑सा स॒त्रमाय॒न्निन्धा॑नाऽअ॒ग्नि स्व॑रा॒भर॑न्तः। त॑स्मिन्न॒हं नि द॑धे॒ नाके॑ऽअ॒ग्निं यमा॒हुर्मन॑व स्ती॒र्णब॑र्हिषम् ॥ (४९)
ऋषियों ने तपस्या से अग्नि को प्रज्वलित किया. अपने स्वर से ऋषियों ने अग्नि को प्रज्वलित किया. हम स्वर्गलोक में अग्नि को धारते हैं. हम अग्नि से विस्तृत कुश के आसन पर विराजने का अनुरोध करते हैं. (४९)
The sages ignited the agni with penance. With their voice, the sages ignited the agni. We edge the agni in heaven. We request Agni to sit on the seat of the elaborate Kush. (49)