हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.59

अध्याय 15 → मंत्र 59 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
लो॒कं पृ॑ण छि॒द्रं पृ॒णाथो॑ सीद ध्रु॒वा त्वम्। इ॒न्द्रा॒ग्नी त्वा॒ बृह॒स्पति॑र॒स्मिन् योना॑वसीषदन् ॥ (५९)
इंद्र देव, अग्नि और बृहस्पति देव ने आप को यहां अधिष्ठित किया है. आप लोक के छिट्र पूरिए, आप श्रव होइए और यहां विराजने की कृपा कीजिए. (५९)
Indra Dev, Agni and Brihaspati Dev have installed you here. You fill the feet of the people, you be brave and please sit here. (59)