हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 15.65

अध्याय 15 → मंत्र 65 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
स॒हस्र॑स्य प्र॒मासि॑ स॒हस्र॑स्य प्रति॒मासि॑ स॒हस्र॑स्यो॒न्मासि॑ सा॒ह॒स्रोऽसि स॒हस्रा॑य त्वा ॥ (६५)
हे अग्नि! आप हजार का मापदंड हैं. आप हजार की प्रतिमा और हजार स्थानों पर विराजनीय हैं. हम हजारों उच्चगति के लिए आप की उपासना करते हैं. (६५)
O agni! You are the yard yard. You are a thousand statues and a thousand places. We worship you for thousands of high speeds. (65)