यजुर्वेद (अध्याय 16)
नमो॑ऽस्तु रु॒द्रेभ्यो॒ ये दि॒वि येषां॑ व॒र्षमिष॑वः। तेभ्यो॒ दश॒ प्राची॒र्दश॑ दक्षि॒णा दश॑ प्र॒तीची॒र्दशोदी॑ची॒र्दशो॒र्ध्वाः। तेभ्यो॒ नमो॑ऽअस्तु॒ ते नो॑ऽवन्तु॒ ते नो॑ मृडयन्तु॒ ते यं द्वि॒ष्मो यश्च॑ नो॒ द्वेष्टि॒ तमे॑षां॒ जम्भे॑ दध्मः ॥ (६४)
हे रुद्र देव! जो स्वर्गलोक में रहते हैं, जो बरसात की तरह बाण बरसाते हैं, हम उन्हं पूर्व दिशा में नमस्कार करते हैं. हम उन्हें पश्चिम दिशा में नमस्कार करते हैं. हम उन्हें उत्तर दिशा में नमस्कार करते हैं. हम उन्हें दक्षिण दिशा में नमस्कार करते हैं. उन रुद्रगण को नमस्कार हो. रुद्रगण द्वारा हमें सुख और रक्षा प्राप्त हो. जो हम से द्वेष भाव रखते हैं, जिन से हम द्वेषभाव रखते हैं. रुद्रगण अपनी दाढ़ में ऐसे लोगों को रख लें (दबा लें). (६४)
O Rudra Dev! Those who live in heaven, those who rain arrows like rain, we greet them in the east direction. We greet them in the west direction. We greet them in the north direction. We greet them in the south direction. Salutations to those Rudras. May we get happiness and protection through Rudragana. Those who hate us, those whom we hate. Rudragan keep such people in your molars (press). (64)