यजुर्वेद (अध्याय 18)
अश्मा॑ च मे॒ मृत्ति॑का च मे गि॒रय॑श्च मे॒ पर्व॑ताश्च मे॒ सिक॑ताश्च मे॒ वन॒स्पत॑यश्च मे॒ हिर॑ण्यं च॒ मेऽय॑श्च मे श्या॒मं च॑ मे लो॒हं च॑ मे॒ सीसं॑ च मे॒ त्रपु॑ च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम् ॥ (१३)
यज्ञ कर्म से खनिज, मिट्टी, पहाड़ों, पर्वतों, रेत, बनस्पतियों में बढ़ोतरी हो. यज्ञ कर्म से सोने, लोहे, कांसे, सीसे व टिन में बढ़ोतरी हो. यज्ञ हमारे लिए सर्वविध फलीभूत हो. (१३)
Yajna karma should increase minerals, soil, mountains, mountains, sand, banspatis. Increase in gold, iron, bronze, lead and tin through yajna karma. May yajna come to fruition for us. (13)