यजुर्वेद (अध्याय 18)
वसु॑ चे मे वस॒तिश्च॑ मे॒ कर्म॑ च मे॒ शक्ति॑श्च॒ मेऽर्थ॑श्च म॒ऽएम॑श्च मऽइ॒त्या च॑ मे॒ गति॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम् ॥ (१५)
य॒ज्ञ से देवगण हमें धन, संपत्ति, कर्म सामर्थ्य, अर्थ, इष्ट साधन व गति प्रदान करें. यह यज्ञ सर्वविध हमारे लिए फलीभूत हो. (१५)
May the gods give us wealth, wealth, karma power, meaning, desired means and speed. May this yajna be fruitful for us. (15)