यजुर्वेद (अध्याय 18)
वाजो॑ नोऽअ॒द्य प्र सु॑वाति॒ दानं॒ वाजो॑ दे॒वाँ२ऽऋ॒तुभिः॑ कल्पयाति। वाजो॒ हि मा सर्व॑वीरं ज॒जान॒ विश्वा॒ऽआशा॒ वाज॑पतिर्जयेयम् ॥ (३३)
देवगण आप अन्न के अधिष्ठाता हैं. आप हमें अन्नदान करने की प्रेरणा देने की कृपा कीजिए. देवताओं को ऋतु के अनुसार अन्न फलीभूत होता रहे. (३३)
Devgan, you are the master of food. Please inspire us to donate food. The gods should continue to bear fruition according to the season. (33)