यजुर्वेद (अध्याय 18)
प्र॒स्त॒रेण॑ परि॒धिना॑ स्रु॒चा वेद्या॑ च ब॒र्हिषा॑। ऋ॒चेमं य॒ज्ञं नो॑ नय॒ स्वर्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे ॥ (६३)
हे अग्नि! पत्थर, परिधि, स्रुक (चम्मच), वेदी, कुशा व ऋचा से आप हमारे इस यज्ञ को देवताओं के गंतव्य की ओर ले जाने की कृपा कीजिए. (६३)
O agni! Please take this yajna of ours towards the destination of the gods with stone, circumference, shruq (spoon), altar, kusha and richa. (63)