हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 2.1

अध्याय 2 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
कृष्णो॑ऽस्याखरे॒ष्ठोऽग्नये॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ वेदि॑रसि ब॒र्हिषे॑ त्वा॒ जुष्टां॒ प्रोक्षा॑मि ब॒र्हिर॑सि स्रु॒ग्भ्यस्त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॒मि ॥ (१)
हे समिधा! हम यज्ञ में इष्ट होने के कारण आप को पवित्र करते हैं. हे वेदिका! यज्ञ के लिए आप भी आवश्यक हैं. आप को भी (प्रक्षालित कर के) पवित्र करते हैं. हे कुशा (यज्ञ में प्रयोग आने वाली घास)! आप को भी हम (प्रक्षालित कर के) पवित्र करते हैं. (१)
O Samidha! We sanctify you by being favored in the yajna. O Vedika! You are also necessary for yajna. They also sanctify you (by bleaching). O Kusha (grass used in yajna)! We also sanctify you (by bleaching). (1)