यजुर्वेद (अध्याय 2)
मयी॒दमिन्द्र॑ऽइन्द्रि॒यं द॑धात्व॒स्मान् रायो॑ म॒घवा॑नः सचन्ताम्। अ॒स्माक॑ꣳ सन्त्वा॒शिषः॑ स॒त्या नः॑ सन्त्वा॒शिष॒ऽउप॑हूता पृथि॒वी मा॒तोप॒ मां पृ॑थि॒वी मा॒ता ह्व॑यताम॒ग्निराग्नी॑ध्रा॒त् स्वाहा॑ ॥ (१०)
हे इंद्र! आप हमें इंद्रमय बनाने की कृपा कीजिए. आप हमारे लिए धन धारण करने, हमें धनवान बनाने, आशीर्वाद प्रदान करने व हमारी आशाएं फलीभूत करने की कृपा कीजिए. आप हमें आशीवाद दीजिए, पृथ्वी माता के समान है. हम ने पृथ्वी माता की उपासना की है. हम यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित करते हैं. आप हमें अपने जैसा तेजोमय बनाएं, हम आप को लोकहित के लिए आहुति समर्पित करते हैं. (१०)
O Indra! Please make us Indramay. Please hold wealth for us, make us rich, bless us and make our hopes come to fruition. You bless us, earth is like mother. We have worshipped Mother Earth. We ignite the agni of yajna. You make us as bright as yourself, we dedicate sacrifices to you for the public interest. (10)