यजुर्वेद (अध्याय 2)
ए॒तं ते॑ देव सवितर्य॒ज्ञं प्राहु॒र्बृह॒स्पत॑ये ब्र॒ह्मणे॑। तेन॑ य॒ज्ञम॑व॒ तेन॑ य॒ज्ञप॑तिं॒ तेन॒ माम॑व ॥ (१२)
हे सविता! हम आप के लिए इस विशाल यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं. आप यज्ञपति हैं. आप इस यज्ञ की व हमारी रक्षा करने की कृपा करें. (१२)
O Savita! We perform the ritual of this huge yajna for you. You are a yajnapati. Please protect this yajna and us. (12)