हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 2.18

अध्याय 2 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
स॒ꣳस्र॒वभा॑गा स्थे॒षा बृ॒हन्तः॑ प्रस्तरे॒ष्ठाः प॑रि॒धेया॑श्च दे॒वाः। इ॒मां वाच॑म॒भि विश्वे॑ गृ॒णन्त॑ऽआ॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयध्व॒ꣳ स्वाहा॒ वाट् ॥ (१८)
हे देवगण! आप अपने आश्रम व अपनी परिधि (मर्यादा) में रहने की कृपा करें. हम आप सब की वाणी से वंदना करते हैं. आप कुश के आसन पर विराजिए और आनंदित होइए. आप सभी के लिए स्वाहा. (१८)
O Gods! Please stay in your ashram and your periphery (maryada). We worship you all with your voice. You sit on the seat of Kush and be happy. Swaha to all of you. (18)