हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 2.34

अध्याय 2 → मंत्र 34 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
ऊर्जं॒ वह॑न्तीर॒मृतं॑ घृ॒तं पयः॑ की॒लालं॑ परि॒स्रु॑तम्। स्व॒धा स्थ॑ त॒र्पय॑त मे पि॒तॄन् ॥ (३४)
ऊर्जा बहन करने वाली व ऊर्जामयी करने वाली, दूधमयी तथा अन्नमयी करने चाली जलधाराएं पितरों को तृप्त करने की कृपा करें. (३४)
Please be pleased to satisfy the ancestors by the streams of energy flowing and energetic, milky and annamayi. (34)