यजुर्वेद (अध्याय 2)
घृ॒ताच्य॑सि जु॒हूर्नाम्ना॒ सेदं प्रि॒येण॒ धाम्ना॑ प्रि॒यꣳ सद॒ऽआसी॑द घृ॒ताच्य॑स्युप॒भृन्नाम्ना॒ सेदं प्रि॒येण॒ धाम्ना॑ प्रि॒यꣳ सद॒ऽआसी॑द घृ॒ताच्य॑सि ध्रु॒वा नाम्ना॒ सेदं प्रि॒येण॒ धाम्ना॑ प्रि॒यꣳ सद॒ऽआसी॑द प्रि॒येण॒ धाम्ना॑ प्रि॒यꣳ सदऽआसी॑द। ध्रु॒वाऽअ॑सदन्नृ॒तस्य॒ योनौ॒ ता वि॑ष्णो पाहि पा॒हि य॒ज्ञं पा॒हि य॒ज्ञप॑तिं पा॒हि मां य॑ज्ञ॒न्यम् ॥ (६)
जुहू नामक यज्ञ साधन को घी प्रिय है. (घी) घृत-सिंचन के बाद वह प्रिय धाम (यज्ञस्थान) पर पधारने की कृपा करें. वह यजमानों को घृत देने की कृपा करें. उपभृत नामक यज्ञ साधन को (घी) घृत-सिंचन के बाद वह प्रिय धाम (यज्ञस्थान) पर पधारने की कृपा करें. रुव नामक यज्ञ साधन को घी प्रिय है. घृत-सिंचन के बाद वह अपने प्रिय धाम (यज्ञस्थान) पर पधारने की कृपा करें. हे विष्णु! आप यज्ञस्थान पर पधारने व विराजने की कृपा कीजिए. आप यज्ञ, साधनों, उसे करने वालों और उस के सहायकों की रक्षा कीजिए. (६)
Ghee is dear to a yajna instrument called Juhu. (Ghee) After the bathing, please reach the beloved dham (yagyasthan). Please give insult to the hosts. Please reach the beloved dham (yajna sthan) after the burning of the yajna instrument (ghee) called Upabhrit. Ghee is dear to a yajna instrument called Ruva. After the bath, please visit his beloved dham (yagyasthan). O Vishnu! Please come to the place of sacrifice and worship. Protect the sacrifice, the means, the doers and its helpers. (6)