यजुर्वेद (अध्याय 20)
त्र॒या दे॒वा एका॑दश त्रयस्त्रि॒ꣳशाः सु॒राध॑सः। बृह॒स्पति॑पुरोहिता दे॒वस्य॑ सवि॒तुः स॒वे। दे॒वा दे॒वैर॑वन्तु मा ॥ (११)
ग्यारह से तिगुने यानी तैंतीस देव तीन समूह में ऐश्वर्य से युक्त बृहस्पति को पुरोहित बना कर देवताओं के अनुशासन में रहें. देवता अपनी दिव्य सामर्थ्य से हमारी रक्षा करने की कृपा करें. (११)
Eleven to three times that is, thirty-three gods, in three groups, make Jupiter with riches as priests and remain in the discipline of the gods. May the gods please protect us with their divine power. (11)