हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 20.2

अध्याय 20 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
निष॑साद धृ॒तव्र॑तो॒ वरु॑णः प॒स्त्यास्वा। साम्रा॑ज्याय सु॒क्रतुः॑। मृ॒त्योः पा॑हि वि॒द्योत् पा॑हि ॥ (२)
आप ब्रतधारी, वरुण, पालक और साम्राज्य के लिए सैकड़ों यज्ञ करने वाले हैं. आप विद्युत्‌ के उत्पात से रक्षा कीजिए. आप मृत्यु से बचाइए. (२)
You are going to perform hundreds of yagyas for Bratdhari, Varuna, Palak and Sambharaj. You protect against electrical nuisance. You save from death. (2)