यजुर्वेद (अध्याय 20)
सि॒ञ्चन्ति॒ परि॑ षिञ्च॒न्त्युत्सि॑ञ्चन्ति पु॒नन्ति॑ च।सुरा॑यै ब॒भ्वै्र मदे॑ कि॒न्त्वो व॑दति कि॒न्त्वः ॥ (२८)
ओषधि का रस इंद्र को प्रसन्न करता व पवित्र करता है. इस रस के लिए और क्या और क्या बोला जाता है. (२८)
The juice of the medicine pleases and purifies Indra. What else is said about this juice? (28)