यजुर्वेद (अध्याय 20)
आया॒त्विन्द्रोऽव॑स॒ऽउप॑ नऽइ॒ह स्तु॒तः स॑ध॒माद॑स्तु॒ शूरः॑। वा॒वृ॒धा॒नस्तवि॑षी॒र्यस्य॑ पू॒र्वीर्द्यौर्न क्ष॒त्रम॒भिभू॑ति॒ पुष्या॑त् ॥ (४७)
इंद्र देव हमारी रक्षा के लिए हमारे पास आएं. वह यहां बैठें. उन की यहां स्तुति की जाए. उन के पराक्रम से बड़ेबड़े कार्यों की बढ़ोतरी हुई. वे हमारे बल को स्वर्गलोक जैसा विस्तृत व पुष्ट करें. (४७)
Indra Dev should come to us to protect us. He sits here. They should be praised here. His might led to the increase of big tasks. May they expand and strengthen our strength like heaven. (47)