यजुर्वेद (अध्याय 20)
इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒२ऽअवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः। बाध॑तां॒ द्वेषो॒ऽअभ॑यं कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम ॥ (५१)
इंद्र देव अच्छे रक्षक, बहुत सहायकों वाले, सर्व वैभव संपन्न व सर्वज्ञ हैं. वे इम से द्वेष रखने वाले को बाधित करें और हमें निर्भय बनाएं, उन की कृपा से हम अच्छे पराक्रम के पालक हो जाएं. (५१)
Indra Dev is a good protector, very helpful, all-glorious and omniscient. They should interrupt those who hate Im and make us fearless, by their grace we become guardians of good might. (51)