यजुर्वेद (अध्याय 20)
अहा॑व्यग्ने ह॒विरा॒स्ये ते स्रु॒चीव घृ॒तं च॒म्वीव॒ सोमः॑।वा॒ज॒सनि॑ꣳ र॒यिम॒स्मे सु॒वीरं॑ प्रश॒स्तं धे॑हि य॒शसं॑ बृ॒हन्त॑म् ॥ (७९)
हे अग्नि! हम आप का आह्वान करते हैं. हम आप के मुख में हवि भेंट करते हैं, आप के लिए सरुवा में घी और पात्र में सोम रहता है. आप हमें अन्न, धन, शरेष्ठवीर, प्रशंसनीय धन, यश व प्रचुर धन प्रदान कीजिए. (७९)
O agni! We call upon you. We offer havi in your mouth, ghee in saruva and som in the vessel for you. You give us food, wealth, fame, fame and abundant wealth. (79)