यजुर्वेद (अध्याय 20)
इन्द्राया॑हि धि॒येषि॒तो विप्र॑जूतः सु॒ताव॑तः। उप॒ ब्रह्मा॑णि वा॒घतः॑ ॥ (८८)
हे इंद्र देव! आप मनोयोग से हमारे यज्ञ में पधारिए. हम आप के लिए सोमरस संस्कारित करने वाले हैं. आप आ कर इन हवियों को ग्रहण करने की कृपा कीजिए. (८८)
O Lord Indra! You come to our yajna with your heart. We are going to make somers sanskar for you. Please come and receive these habits. (88)